Hanuman Chalisa in Hindi

हनुमान चालीसा हिंदी में | Hanuman Chalisa in Hindi – हनुमान चालीसा का पाठ करना सदा ही अत्यंत शुभ फलदायक सिद्ध होता है.

आप लोगों में से अधिकतर लोग हनुमान चालीसा का पाठ नियमित रूप से अवस्य करते होंगे. हनुमान चालीसा के पाठ करने मात्र से ही आपके अंदर एक आत्मबिस्वास, एक कॉन्फिडेंस का भाव आ जाता है. मन को असीम शान्ति मिलती है.

जब भी किसी को अगर किसी भी प्रकार का भय लगे तो वह हनुमान चालीसा की कहीं से भी कोई भी श्लोक पढ़ ले तो तुरंत ही उसका भय चला जाता है.

अगर सम्पूर्ण बिस्वास के साथ हनुमान चालीसा का सम्पूर्ण पाठ किया जाए तो भय का नाश होना ही है.

इसके अलावा हनुमान चालीसा पाठ के कितने प्रभाव हैं इसके बारे में हम किसी दुसरे पोस्ट में चर्चा करेंगे. आप सब यहाँ इस पोस्ट पर हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए आयें हैं.

तो हमने अपनी तरफ से सम्पूर्ण कोशिश की है की आप सबको हनुमान चालीसा का पाठ करने में सरलता और सुगमता का अनुभव है.

हनुमान चालीसा पाठ के उपर हमने एक ऑडियो फाइल दी हुई है. आप उसे प्ले करने के पश्चात भी हनुमान चालीसा का पाठ कर सकतें हैं. इससे आपको सही उच्चारण के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने में सुविधा होगी और आपका ध्यान भी नहीं भटकेगा.

हनुमान चालीसा पाठ के पश्चात हनुमान जी की आराधना और स्तुति करें, साथ ही हनुमान जी की आरती | Hanuman Ji Ki Aarti सम्पूर्ण भक्ति और बिस्वास के साथ करें.

Hanuman Chalisa in Hindi | हनुमान चालीसा हिंदी में

Hanuman Chalisa in Hindi

Source : Soundcloud

|| श्री हनुमान चालीसा ||

Hanuman Chalisa in Hindi
Hanuman Chalisa in Hindi

|| दोहा ||

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि |
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार |
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ||

|| चौपाई ||

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥

लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद, सारद सहित अहीसा॥14॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना ॥22॥

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥
और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥ 29॥
साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥31॥
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ 34॥

और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥
जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 39॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥

|| दोहा ||

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभुप॥

Video | विडियो

हनुमान चालीसा के सुगमता और सरलता से पाठ संभव करने के लिए हमने निचे हनुमान चालीसा का विडियो दिया हुआ है. आप इस विडियो को देखें और हनुमान जी के दर्शन का लाभ लें.

Hanuman Chalisa in Hindi

Source : YouTube Video T Series

आप सब हनुमान चालीसा का पाठ करें, हनुमान जी पर सम्पूर्ण श्रद्धा और बिस्वास रखें.

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By Shri Sanjay Ji

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