Hanuman Bisa

हनुमान बीसा | Hanuman Bisa की रचना हनुमान जी के परम भक्त श्री यशपाल जी ने की है. इसमें 20 श्लोक हैं. हनुमान चालीसा की तरह हनुमान बीस का पाठ करना भी अत्यंत ही शुभ फलदायक है.

रोगों, कष्टों और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए आप श्री हनुमान बीस का पाठ नियमित रूप से अवस्य करें.

Hanuman Bisa | हनुमान बीसा

Hanuman Bisa
Hanuman Bisa

|| श्री हनुमान बीसा ||

|| दोहा ||

राम भक्त विनती करूँ,सुन लो मेरी बात । 
दया करो कुछ मेहर उपाओ, सिर पर रखो हाथ ।। 

|| चौपाई ||

जय हनुमन्त, जय तेरा बीसा,कालनेमि को जैसे खींचा ।। 1 ॥

करुणा पर दो कान हमारो,शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।। 2 ॥

राम भक्त जय जय हनुमन्ता, लंका को थे किये विध्वंसा ।। 3 ॥

सीता खोज खबर तुम लाए, अजर अमर के आशीष पाए ।। 4 ॥

लक्ष्मण प्राण विधाता हो तुम,राम के अतिशय पासा हो तुम ।। 5 ॥

जिस पर होते तुम अनुकूला, वह रहता पतझड़ में फूला ।। 6 ॥

राम भक्त तुम मेरी आशा, तुम्हें ध्याऊँ मैं दिन राता ।। 7 ॥

आकर मेरे काज संवारो, शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।। 8 ॥

तुम्हरी दया से हम चलते हैं, लोग न जाने क्यों जलते हैं ।। 9 ॥

भक्त जनों के संकट टारे, राम द्वार के हो रखवारे ।। 10 ॥

मेरे संकट दूर हटा दो, द्विविधा मेरी तुरन्त मिटा दो ।। 11 ॥

रुद्रावतार हो मेरे स्वामी, तुम्हरे जैसा कोई नाहीं ।। 12 ॥

ॐ हनु हनु हनुमन्त का बीसा, बैरिहु मारु जगत के ईशा ।। 13 ॥

तुम्हरो नाम जहाँ पढ़ जावे, बैरि व्याधि न नेरे आवे ।। 14 ॥

तुम्हरा नाम जगत सुखदाता, खुल जाता है राम दरवाजा ।। 15 ॥

संकट मोचन प्रभु हमारो, भूत प्रेत पिशाच को मारो ।। 16 ॥

अंजनी पुत्र नाम हनुमन्ता, सर्व जगत बजता है डंका ।। 17 ॥

सर्व व्याधि नष्ट जो जावे, हनुमद् बीसा जो कह पावे ।। 18 ॥

संकट एक न रहता उसको, हं हं हनुमंत कहता नर जो ।। 19 ॥

ह्रीं हनुमंते नमः जो कहता,उससे तो दुख दूर ही रहता ।। 20 ॥

|| दोहा ||

मेरे राम भक्त हनुमन्ता, कर दो बेड़ा पार ।

हूँ दीन मलीन कुलीन बड़ा, कर लो मुझे स्वीकार ।।

राम लषन सीता सहित, करो मेरा कल्याण ।

ताप हरो तुम मेरे स्वामी, बना रहे सम्मान ।।

प्रभु राम जी माता जानकी जी, सदा हों सहाई ।

संकट पड़ा यशपाल पे, तभी आवाज लगाई ।।

श्री हनुमान जी की स्तुति के लिए आप Bajrang Baan का भी पाठ कर सकतें हैं.

Hanuman Bisa Lyrics

Shri Hanumad Bisa
Shri Hanumad Bisa

Shri Hanuman Bisa

|| Shri Hanumad Bisa ||

|| Doha ||

Ram Bhakt Vinati Karun, Sun Lo Meri Baat.
Daya Karo Kuch Mehar Upaao, Sir Par Rakho Hath.

|| Choupai ||

Jai Hanumant, Jai Tera Bisa, Kalnemi Ko Jaise Khincha.

Karuna Par Do Kaan Hamaro, Shatru Hamare Tatkshan Maro.

Ram Bhakt Jai Jai Hanumanta, Lanka Ko The Kiye Vidhwansa.

Sita Khoj Khabar Tum Laye, Ajar Amar Ke Aashish Paaye.

Lakshman Pran Vidhata Ho Tum, Ram Ke Atishay Pasa Ho Tum.

Jis Par Hote Tum Anukula, Vah Rahta Patjhar Me Phula.

Ram Bhakt Tum Meri Aasha, Tumhe Dhyaaun Main Din Rata.

Aakar Mere Kaaj Sanvaro, Shatru Hamare Tatkshan Maro.

Tumhari Daya Se Ham Chalten Hain, Log Na Jane Kyon Jalten Hain.

Bhakt Jano Ke Sankat Tare, Ram Dwar Ke Ho Rakhvare.

Mere Sankat Dur Hata Do, Dwividha Meri Turant Mita Do.

Rudravtar Ho Mere Swami, Tumhare Jaisa Koi Nahi.

Om Hanu Hanu Hanumant Ka Bisa, Barihu Maru Jagat Ke Isha.

Tumharo Naam Jahan Padh Jave, Bairi Vyadhi Na Nere Aave.

Tumhara Naam Jagat Sukhdata, Khul Jata Hai Ram Darvaja.

Sankat Mochan Prabhu Hamaro, Bhut Pret Pishach Ko Maro.

Anjani Putra Nam Hanumanta, Sarv Jagat Bajta Hai Danka.

Sarv Vyadhi Nasht Jo Jave, Hanumad Bisa Jo Kah Pawe.

Sankat Ek Na Rahta Usko, Hn Hn Hanumant Kahta Nar Jo.

Hrin Hanumante Namah Jo Kahta, Usse To Dukh Dur Hi Rahta.

|| Doha ||

Mere Ram Bhakt Hanumanta, Kar Do Beda Par.

Hun Din Malin Kulin Bada, Kar Lo Mujhe Swikar.

Ram Lakhan Sita Sahit, Karo Mera Kalyan.

Taap Haro Tum Mere Swami, Bana Rahe Samman.

Prabhu Ram Ji Mata Jaanki Ji, Sada Ho Sahai.

Sankat Pada Yashpal Pe, Tabhi Aawaj Lagai.

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श्री हनुमान बीसा का पाठ करना अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी होता है. इसके सच्चे ह्रदय से पाठ से शरीर रोगों और कष्टों से मुक्त होता है. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है. हनुमान जी की कृपा अपने भक्तों पर सदा बनी रहोती है.

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